28 C
New Delhi

बॉलीवुड हिन्दू धर्मम् च ! बॉलीवुड और हिन्दू धर्म !

Date:

Share post:

फ़ाइल फोटो

बॉलीवुडेन पूर्ण समाज एकीकृत अस्ति, युवा वंशेन गृहीत्वा बालकाः बुजुर्ग युवा च चित्रपटे नायक नायिका कृत अभिनयं वेशभूषास्य पश्यत्वा तेन अनुकरणम् कुर्वन्ति ! 80 दशके आगतः चित्रपटा: अवश्यमेव समाजस्य नव दिशा प्रदनोतिव सफलं भव: वरन तयो उपरांतस्य दशकानाम् आगतः चित्रपट असाधु चित्रण समाजिक विद्वेषस्य प्रचुर मात्रेण प्रयोगम् अभवत् !

बॉलीवुड से पूरा समाज जुड़ा है युवा पीढ़ी से लेकर बच्चे बूढ़े तक,युवा और बच्चे फिल्मों में नायक नायिका के किये गए अभिनय,वेशभूषा को देखकर उनका अनुकरण करते हैं ! 80 के दशक में आई फिल्में जरूर समाज को नई दिशा दे पाने में सफल रही परन्तु उसके बाद के दशकों में आई फिल्मों में फूहड़ता सामाजिक विद्वेष का प्रचुर मात्रा में प्रयोग हुआ !

फ़ाइल फोटो

केवलं हिन्दू धर्मस्य अपमानित कृताय चित्रपटानाम् निर्माणम् अभवत् ! अचल शीघ्रेव पाताल लोक नामकस्य वेबसीरीज निर्माण अभवत् यस्मिन् हिन्दू धर्मस्य भावनानाम् स्वच्छंदित्वा दीपस्तम्भ आरचयत् ! अन्ते कस्मिन् च धर्मस्य अपमानम् चित्रपटेषु किं न भवति ! यतः वालीवुडे विशेष धर्मस्य सर्वधिकारम् सन्ति,प्रथमे धार्मिक संगीतस्य निर्मित कृत तत्परः गुलशन कुमारस्य हनम्,इदानिम् तत्काले सुशांत सिंह राजपूतस्य आत्मघातस्य कारणम् सम्पूर्ण वालीवुडे विशेष कौमस्य एकाधिकारस्य अन्तरपट उद्घाटित्वा कृतेयु: !

केवल हिन्दू धर्म को अपमानित करने के लिए फिल्मों का निर्माण हुआ ! अभी जल्द ही पाताल लोक नामक वेब सीरीज का निर्माण हुआ जिसमें हिन्दू धर्म की भावनाओं की खुलकर मजाक बनाया गया ! आखिर किसी और धर्म का अपमान फिल्मों में क्यों नहीं होता है ! क्योंकि वॉलीवुड पर विशेष कौम का सर्वाधिकार है,पहले धर्मिक संगीत को बनाने वाले गुलशन कुमार की हत्या,अभी हाल में सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के कारण पूरे वॉलीवुड में विशेष कौम के एकाधिकार की पोल खोल कर रख दी !

प्रतीकात्मक चित्र

केवलम् हिन्दू धर्मस्य अपमानम् !

केवल हिन्दू धर्म का अपमान !

केचन दिवस पूर्वे पी के इति चित्रपट आगतः केषु भगवतः शिवः राहें धावित्वा,गणपति इत्यदयः देवानाम् चित्रम् इत्यदयः आरोपणित्वा, केवलं हिन्दू धर्मस्य देवा:एव पूर्ण चित्रपटे अपमानित कृतवान्, हिन्दू धर्मगुरुम् अनृतम् स्पष्टम् कृतवान्,अचल शीघ्र पाताल लोक इति वेबसीरीज स्पष्टम् अकरोत् केषु उत्पटित्वा हिन्दू धर्मम् अनृतम् अदृक्ष्यत् ! अन्ते ऐन हिन्दू धर्मम् अनृतम् वार्तेनस्य अनुज्ञापी केन आददात् ?

कुछ दिन पहले पी के फ़िल्म आयी जिसमें भगवान शिव को रास्ते पर दौड़ा कर,गणेश आदि देवताओं के पोस्टर आदि लगाकर,केवल हिन्दू धर्म के देवताओं को ही पूर्ण फ़िल्म में अपमानित किया गया,हिन्दू धर्मगुरु को झूंठा साबित किया गया,अभी जल्द पाताल लोक वेबसीरीज को दिखाया गया जिसमें खुलकर हिन्दुधर्म को झूंठा दिखाया गया ! आखिर इनको हिन्दू धर्म को गलत बताने का ठेका किसने दे दिया है ?

निष्कर्षम् :

निष्कर्ष :

अपि च बहु लिख शक्नोति,ज्ञातव्यम् शक्नोति,वस्तुतः भवतः जनाः सर्वमपि जानयन्ति,केवलं इति कथ शक्नोति,वस्तुतः त्वरित वालीवुडे प्रतिबंध न कृताः तर्हि पूर्ण समाज दूषितम् भविष्यति। हिन्दू धर्मस्य अपमानस्य कारणम् सामाजिक हिंसापि सम्भवति ! तस्य जिम्मेदार वालीवुडस्य एकाधिकार प्राप्त विशेष धर्म भविष्यति !

और भी बहुत कुछ लिखा जा सकता है,बताया जा सकता है,मगर आप लोग सब कुछ जानते भी हैं,बस इतना कहा जा सकता है जल्द ही अगर बॉलीवुड पर लगाम नहीं लगाया गया तो पूर्ण समाज दूषित हो जाएगा ! हिन्दू धर्म के अपमान के कारण सामाजिक हिंसा भी हो सकती है,जिसके जिम्मेदार वालीवुड के एकाधिकार प्राप्त विशेष कौम होगा !

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Related articles

How India’s BrahMos Became One of the World’s Most Potent Strike Weapons

India’s BrahMos supersonic cruise missile has emerged as one of the most formidable weapons in the country’s conventional...

From Import Dependence to Defence Exporter: How India Transformed Its Defence Manufacturing Capabilities in a Decade

Over the past decade, India’s defence sector has undergone a structural transformation. A country historically dependent on overseas...

How Well Did India Organize the 2026 BRICS Summit, and What Were Its Key Outcomes?

India successfully hosted the 18th BRICS Summit in New Delhi on September 12–13, 2026, at a particularly difficult...

Why and How “Hanuman Ansh” Became a New Cultural Phenomenon in India: Faith, Youth, Social Media and the Return of Spiritual Storytelling

Introduction: A ₹10-Lakh Opening That Became a Cultural Conversation Every once in a while, a film succeeds in a...