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Wednesday, December 7, 2022

हिन्दुवः दात्तु ज्ञानम्, स्वेषु आगतः तर्हि भवितुम् तप्त ! हिंदुओं को देते ज्ञान,अपने पे आई तो हुए परेशान !

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1अगस्तस्य ईदुल अजहा अस्ति ! यस्य कारणं सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क: अकथयत् तत् कोपि तस्य नमाज पठने प्रतिबंधम् न कृत शक्नोति ! अयम् मुस्लिम जनानाम् विशाल पर्वम् सन्ति ! इति दिवस मुस्लिम आपणेषु गत्वा पशवः क्रीणित्वा आनयति, सम्प्रति पश्वानाम् आपणैव न लगन्ति ! तथेषु पर्वम् केन भव शक्नोति ? प्रतिबंधम् लगयते उचितम् न अस्ति ! सपा सांसद: ईदस्य नमाजम् गृहीत्वा अकथयत् तत् यदैव देशस्य सर्वे मुस्लिमा:मस्जिदेषु गत्वा नमाज पठित्वा आशीर्वाद न मांगिष्यन्ति, तथैव कोरोनाम् भंजयते न शक्नोति !

1अगस्त को ईदुल अजहा है जिसके कारण सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने कहा है कि कोई उनके नमाज पढ़ने पर पाबंदी नहीं लगा सकता ! ये मुसलमानों का बड़ा त्यौहार है ! इस दिन मुसलमान बाजारों में जाकर जानवर खरीद कर लाते है,अब जानवरो के बाजार ही नहीं लग रहे है ! ऐसे में त्यौहार कैसे हो सकता है ? पाबंदी लगाना ठीक नहीं है ! सपा सांसद ने ईद की नमाज को लेकर कहा कि जब तक देश के सभी मुसलमान मस्जिदों में जाकर नमाज पढ़कर दुआ नहीं मांगेंगे, तब तक कोरोना को नहीं भगाया जा सकता !

संगीत सोमस्य उत्तरम् !

संगीत सोम का जवाब !

उत्तरम् दात्तुम् बीजेपी विधायक संगीत सोम: अकथयत् तत् सांसदम् ज्ञातव्यम् अयम् तेषां खालास्य सरकार न अस्ति, भाजपा सरकारं अस्ति अत्र च् नियमानुसार कार्यम् भवति ! वस्तुतः सांसदस्य वार्ते शक्तिम् अस्ति तर्हि सर्वेण प्रथमें पकिस्ताने कोरोना लुप्तम् भवनीय स्म ! सपा सांसदमपि नियमस्य पालनम् करणीय ! सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्कम् परामर्शम् दात्तुम् संगीत सोमः अकथयत् तत्यदि सपा सांसद वार्ता न मान्यते तर्हि यस्य प्रकार आजम खानस्य ईद कारागारे मनति, तेन बकरीदपि कारागारे मनिष्यति ! संगीत सोमः अकथयत् बकरीदे केन अकथयत्, अजा: कर्तन्तु, शाकम्,सुकंदम् खादित्वापि पर्वम् मान्यन्तैति शक्नोति !

जवाब देते हुए बीजेपी विधायक संगीत सोम ने कहा कि सांसद को पता होना चाहिए कि यह उनकी खाला की सरकार नहीं है, भाजपा सरकार है और यहां कायदे और कानून से काम होता है ! अगर सांसद के बयान में दम है तो सबसे पहले पाकिस्तान में कोरोना गायब हो जाना चाहिए था ! सपा सांसद को भी कानून का पालन करना चाहिए ! सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क को सुझाव देते हुए संगीत सोम ने कहा कि अगर सपा सांसद बात नहीं मानते हैं तो जिस तरह आजम खान की ईद जेल में मनी है, उनकी बकरीद भी जेल में मनेगी ! संगीत सोम ने कहा कि बकरीद पर यह किसने कहा है, बकरा काटे जाएं, साग आलू खाकर भी त्यौहार मनाया जा सकता है !

आगतः जनीति किं कथ्यति पश्चिम बंगस्य सांसदः अर्जुन सिंह: !

आइये जानते हैं क्या कहते हैं पश्चिम बंगाल के बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह !

हिंदवः ऑर्गेनिक प्रकारेण होलिका,दीपावली अन्यतमा च् पर्वाणि मान्यासि परामर्शम् प्राप्तम् भवति ! अहम् स्व मुस्लिम भातृभि: साग्रह प्रार्थनाम् करिष्यामि ! तत् सः अपि सम्प्रति पशवानाम् न कर्त्तित्वा ऑर्गेनिक प्रकारेण बकरीद मान्यन्तु, पशवानाम् कर्ततेषु तेषां रक्त जले गच्छन्ति येन जलम् अशुद्धम् भवन्ति, यस्य कारणम् वृहद वृहद रोगाः प्रस्सरित शक्नोन्ति ! मुस्लिम भ्रातरः अपि ऑर्गेनिक प्रकारेण बकरीद मान्यतुम् शक्नोति, आपणेन केक गृहीत्वा तस्मिन् पशवानाम् चित्र निर्मयित्वा तस्य कर्तयतु सम्पूर्ण परिजन: सह उत्सवस्य आनन्दम् मान्यन्तु !

हिंदुओं को ऑर्गेनिक तरीके से होली दिवाली और अन्य त्योहार मनाने की सलाह मिलती रही है मैं अपने मुस्लिम भाइयों से अपील करूंगा ! कि वह भी अब जानवरों को न काटकर आर्गेनिक तरीके से बकरीद मनाएं,जानवरों को काटने पर उनका खून पानी में जाता है जिससे पानी अशुद्ध हो जाता है, जिसके कारण बड़ी बड़ी बीमारियां फैल सकती हैं ! मुस्लिम भाई भी ऑर्गेनिक तरीके से बकरीद मना सकते हैं, बाजार से केक लाकर उस पर जानवरों का चित्र बना कर उसको काटे और पूरे परिवार सहित उत्सव का आंनद मनाएं !

अर्जुन सिंह: कलिकाता उच्चन्यायालये पशवानाम् कर्ततसि निवारिताय एकः जनहित याचिका प्रारम्भयते, यस्य कारणम् सम्प्रति कोलाहलम् भवति !

अर्जुन सिंह ने कलकत्ता हाइकोर्ट में जानवरों के कत्ल को रोकने के लिए एक जनहित याचिका दायर की है, जिसके कारण अब हल्ला मच रहा है !

कुत्र अस्ति PETA किं न ददाति कश्चित DETA ?

कहाँ है PETA क्यों नहीं देता कोई DETA ?

केचन दिवस पूर्वे PETA इति नामकम् संस्थाम् रक्षाबंधनम् सह गां चर्मम् तर्कम् अददात् स्म, तस्मात् पूर्वे जन्माष्टमे गो: घृत न प्रयोग कृतस्य साग्रह प्रार्थनाम् इत्यदयः अकरोत् आसीत्, सम्प्रति अस्य बकरिद्स्य अवसरे सः अजस्य रक्षणार्थाय कश्चित उद्घोष किं न विन्दति, यदि तस्य पार्श्व कश्चित उद्घोष न अस्ति तर्हि अस्य अर्थः अस्ति तत् सः अपि कश्चित विशेषेण प्रभावितः सन्ति ?

कुछ दिन पहले PETA नामक एक संस्था ने रक्षाबन्धन के साथ गाय व चमड़ा का तर्क दिया था, उससे पहले जन्माष्टमी पर गाय का घी न प्रयोग करने की अपील इत्यादि की थी, अब इस बकरीद के मौके पर वह बकरे की रक्षा के लिए कोई स्लोगन क्यों नहीं ढूंढ रहा है, अगर उसके पास कोई स्लोगन नहीं है तो इसका मतलब है कि वह भी किसी विशेष से प्रभावित है ?

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