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पीएम मोदी: मध्यप्रदेशे १.७५ लक्ष गृहाणां अकारयत् गृह प्रवेशम् ! पीएम मोदी ने मध्य प्रदेश में 1.75 लाख घरों का कराया गृह प्रवेश !

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: शानिवासरम् चित्रपट वार्तास्य माध्यमेन मध्यप्रदेशे प्रधानमंत्री आवास योजनास्य (ग्रामीण) अनुरूपम् अनिर्मयत् १.७५ लक्ष गृहाणां गृह प्रवेश कार्यक्रमस्य उद्घाटनम् अकरोत् !

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत बने 1.75 लाख घरों के गृह प्रवेश कार्यक्रम का उद्घाटन किया !

साभार ट्वीटर

इति कालम् मध्यप्रदेशस्य मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान: अपि चित्रपट श्रोतेन उपस्थितम् अरहत् इति अवसरे पीएम मोदी: सर्वात् पूर्वम् सुदृढ़ गृहम् प्राप्तम् केचन लाभार्थै: वार्ता तेषां च् अनुभवं अज्ञायत् ! इति कालम् सः सर्वाणि लाभार्थानि शुभाशयः अददात् !

इस दौरान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी वीडियो लिंक के जरिए मौजूद रहे इस मौके पर पीएम मोदी ने सबसे पहले पक्का घर पाने वाले कुछ लाभार्थियों से बात और उनके अनुभव को जाना ! इस दौरान उन्होंने सभी लाभार्थियों को बधाई दी !

प्रधानमंत्री: अकथयत्, अद्यापि इदृशं सखै: मम चर्चाम् अभवत् यानि अद्य स्व सुदृढ़ गृह प्राप्यत्, स्व स्वप्नस्य गृह प्राप्यत् ! सम्प्रति मध्यप्रदेशस्य १.७५ लक्ष इदृशं कुटुम्बानि, यत् अद्य स्व गृहे प्रवेशम् कुर्वन्ति, यस्य गृहप्रवेशम् भवति, तानि अपि अहम् बहु शुभाशयः ददामि, शुमकामनानि ददामि !

प्रधानमंत्री ने कहा, अभी ऐसे साथियों से मेरी चर्चा हुई, जिनको आज अपना पक्का घर मिला है, अपने सपनों का घर मिला है ! अब मध्य प्रदेश के पौने 2 लाख ऐसे परिवार, जो आज अपने घर में प्रवेश कर रहे हैं, जिनका गृह – प्रवेश हो रहा है, उनको भी मैं बहुत बधाई देता हूँ, शुभकामनाएं देता हूँ !

इतिदा भवतः सर्वानां दीपावली, भवतः सर्वानां उत्सवानां प्रसन्नताम् केचन चैव भविष्यन्ति ! कोरोना काल न भवति तर्हि अद्य भवतः जीवनस्य इति वृहद प्रसन्नते सम्मिलिताय, भवतः गृहस्य एकम् सदस्य, भवतः प्रधान सेवकम् भवतः मध्य भवति !

इस बार आप सभी की दीवाली, आप सभी के त्योहारों की खुशियां कुछ और ही होंगी ! कोरोना काल नहीं होता तो आज आपके जीवन की इतनी बड़ी खुशी में शामिल होने के लिए, आपके घर का एक सदस्य, आपका प्रधान सेवक आपके बीच होता !

अद्यस्य इयम् दिवस कोटि देशवासिनां तम् विश्वासमपि सख्त करोति तत सद मंशेन निर्मयत् सरकारी योजनानि साकारमपि भवन्ति तेषां लाभार्थीनामेव प्राप्यतेपिसन्ति ! यः सखानि अद्य स्व गृहम् प्राप्यत्, अहम् अनुभवम् कृतशक्नोमि !

आज का ये दिन करोडों देशवासियों के उस विश्वास को भी मज़बूत करता है कि सही नीयत से बनाई गई सरकारी योजनाएं साकार भी होती हैं और उनके लाभार्थियों तक पहुंचती भी हैं ! जिन साथियों को आज अपना घर मिला है, उनके भीतर के संतोष, उनके आत्मविश्वास को मैं अनुभव कर सकता हूँ !

सामान्य रूपे प्रधानमंत्री आवास योजनास्य अनुरूपम् एकम् गृहम् निर्मयते औसतन १२५ दिवसस्य कालम् व्यतीतति ! कोरोनास्य इति काले पीएम आवास योजनास्य अनुरूपम् गृहानि केवलं ४५ इत्येन ६० दिवसैव निर्मियित्वा सम्पूर्ण कृत दीयते ! आपदां अवसरे परिवर्तितस्य इयम् बहैव उत्तमम् उदाहरणमस्ति !

सामान्य तौर पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक घर बनाने में औसतन 125 दिन का समय लगता है ! कोरोना के इस काल में पीएम आवास योजना के तहत घरों को सिर्फ 45 से 60 दिन में ही बनाकर तैयार कर दिया गया है ! आपदा को अवसर में बदलने का ये बहुत ही उत्तम उदाहरण है !

इति तिव्रे बहु वृहद योगदानम् अरहत् नगरात् पुनरागतम् अस्माकं श्रमिक सखानाम् ! अस्माकं इति सखानि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियानस्य पूर्ण लाभ गृहतम् स्व कुटुम्बस्य रक्षति स्व रंक भ्राताय भगिन्या च् गृहमपि निर्मित कृत्वा अददात् !

इस तेजी में बहुत बड़ा योगदान रहा शहरों से लौटे हमारे श्रमिक साथियों का ! हमारे इन साथियों ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोज़गार अभियान का पूरा लाभ उठाते हुए अपने परिवार को संभाला और अपने गरीब भाई – बहनों के लिए घर भी तैयार करके दे दिया !

मह्यं सन्तोषमस्ति तत पीएम गरीब कल्याण अभियानेन मध्यप्रदेशसह देशस्य अनेकानि राज्येषु लगभगम् २३ सहस्र कोटि रूप्यकस्य कार्य पूर्णम् कृतवान !

मुझे संतोष है कि पीएम गरीब कल्याण अभियान से मध्य प्रदेश सहित देश के अनेक राज्यों में करीब 23 हज़ार करोड़ रुपए के काम पूरे किए जा चुके हैं !

पूर्व रंक सर्कारस्य पश्च धावति स्म, सम्प्रति सरकार जनानाम् पार्श्व गच्छति ! सम्प्रति कश्चितस्य इच्छास्य अनुरूपम् अनुक्रमणिके नामम् सम्मिलितं निष्कासितं वा नाशक्नोति ! चयनेन गृहित्वा निर्माणेव वैज्ञानिक पारदर्शी च् प्रकारम् स्वीकारयति ! सामग्रेण गृहित्वा निर्माणेव, स्थानीय स्तरे उप्लब्धम् उपयोगिम् च् वस्तुनि अपि प्राथमिकताम् दीयते !

पहले गरीब सरकार के पीछे दौड़ता था, अब सरकार लोगों के पास जा रही है ! अब किसी की इच्छा के अनुसार लिस्ट में नाम जोड़ा या घटाया नहीं जा सकता ! चयन से लेकर निर्माण तक वैज्ञानिक और पारदर्शी तरीका अपनाया जा रहा है ! मटेरियल से लेकर निर्माण तक, स्थानीय स्तर पर उपलब्ध और उपयोग होने वाले सामानों को भी प्राथमिकता दी जा रही है !

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