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पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में उठाए कई सवाल, पूछा- आखिर कब तक भारत को UN के डिसिजन मेकिंग स्ट्रक्चर से अलग रखा जाएगा?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा की आम सभा को संबोधित किया। कोरोना संकट के कारण संयुक्त राष्ट्र महासभा वर्चुअल तरीके से आयोजित की गई। पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 75वें सत्र की आम सभा को संबोधित करते हुए कोरोना वायरस के हालात पर चर्चा की। अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र से कुछ कड़े सवाल भी पूछे। पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सीट का मुद्दा भी उठाया। जानकारों की माने तो हाल के वर्षों में संयुक्त राष्ट्र में सुधार करने को लेकर किसी वैश्विक नेता की तरफ से दिया गया यह सबसे प्रभावशाली भाषण रहा।

पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन की शुरूआत संयुक्त राष्ट्र में सुधार के मुद्दे को लेकर की।

पीएम मोदी ने कहा, ‘1945 की दुनिया आज की दुनिया से एकदम अलग है। विश्व कल्याण की भावना से जिस संस्था का गठन हुआ था, वह भी उस समय के हिसाब से थी। लेकिन आज हम एक बिल्कुल अलग दौर में हैं। 21वीं सदी में हमारे वर्तमान की हमारे भविष्य की आवश्यकताएं और चुनौतियां पहले से अलग हैं। ऐसे में यह संस्था क्या आज भी प्रासंगिक है? सदी बदल जाएं और हम न बदले तो बदलाव लाने की ताकत भी कमजोर हो जाती है।’

पीएम मोदी ने आगे कहा कि, ‘यह सच की हमने तीसरा विश्व युद्ध नहीं देखा, लेकिन हमने कई युद्ध, गृह युद्ध देखे हैं। कितने ही आतंकी हमलों ने दुनिया को हिला कर रख दिया। खून की नदियां बहती रहीं। इन युद्धों में आतंकी हमलों में कई लोगों ने जान गंवाई है जो हमारे व आपकी तरह इंसान ही थे। हजारों बच्चों ने जान गंवाई है। कई बेघर होकर रिफ्यूजी हो गए। उस समय और आज भी संयुक्त राष्ट्र के प्रयास क्या पर्याप्त थे। कोरोना महामारी से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र कहां है?’

पीएम मोदी ने कहा, ‘भारत के लोग UN के रिफॉर्म्स को लेकर जो प्रोसेस चल रहा है, उसके पूरा होने का बहुत लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। भारत के लोग चिंतित हैं कि क्या ये प्रक्रिया कभी लॉजिकल एंड तक पहुंच पाएगी। आखिर कब तक भारत को संयुक्त राष्ट्र के डिसिजन मेकिंग स्ट्रक्चर से अलग रखा जाएगा?’

पीएम मोदी ने आगे कहा कि, ‘जिस देश ने वर्षों तक वैश्विक अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करने और वर्षों की गुलामी, दोनों को जिया है। जिस देश में हो रहे परिवर्तनों का प्रभाव दुनिया के बहुत बड़े हिस्से पर पड़ता है। उस देश को आखिर कब तक इंतजार करना पड़ेगा? प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत पूरे विश्व को एक परिवार मानता है और यह उसकी संस्कृति, संस्कार और सोच का हिस्सा है। संयुक्त राष्ट्र में भी भारत ने हमेशा विश्व कल्याण को ही प्राथमिकता दी है।’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘भारत जब किसी से दोस्ती का हाथ बढ़ाता है, तो वो किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं होती। भारत जब विकास की साझेदारी मजबूत करता है, तो उसके पीछे किसी साथी देश को मजबूर करने की सोच नहीं होती। हम अपनी विकास यात्रा से मिले अनुभव साझा करने में कभी पीछे नहीं रहते।’

पीएम मोदी ने कोरोना को लेकर भारत द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर जोर देते हुए कहा, ‘कोरोना महामारी के इस मुश्किल समय में भी भारत की फार्मा इंडस्ट्री ने 150 से अधिक देशों को जरूरी दवाइयां भेजीं हैं। विश्व के सबसे बड़े वैक्सीन उत्पादक देश के तौर पर आज मैं वैश्विक समुदाय को एक और आश्वासन देना चाहता हूं। भारत की वैक्सीन प्रोडक्शन और वैक्सीन डिलीवरी क्षमता पूरी मानवता को इस संकट से बाहर निकालने के लिए काम आएगी। पीएम मोदी ने कहा कि भारत की आवाज मानवता, मानव जाति और मानवीय मूल्यों के दुश्मन- आतंकवाद, अवैध हथियारों की तस्करी, ड्रग्स, मनी लॉन्डरिंग के खिलाफ हमेशा उठती रहेगी।’

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