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Monday, October 3, 2022

सरकारी योजनाएं अब वोट आधारित नहीं, ‘सभी का विकास’ एक मात्र आधार, अटल टनल से सेना को मिली रफ्तार, चीन पर अंडरग्राउंड स्ट्राइक – प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण अटल टनल देश को समर्पित कर दिया है | ये अटल टनल हिमाचल प्रदेश के रोहतांग में है | इस टनल के रास्ते लेह और मनाली के बीच की दूरी 46 किमी कम हो जाएगी | इस टनल के रास्ते लद्दाख में तैनात सैनिकों से सालभर बेहतर संपर्क बना रहेगा | आपात परिस्थितियों के लिए ये सुरंग सबसे कारगर साबित होगी और विशेष परिस्थितियों में अटल टनल आपातकालीन निकास का काम करेगी | अटल टनल की डिजाइन घोड़े की नाल की तरह बनाई गई है | डबल लेन टनल निर्माण में 3300 करोड़ की लागत आई है | यह देश के लिए रक्षा दृष्टिकोण से भी अहम है | इसमें हर 150 मीटर पर टेलीफोन और 60 मीटर पर वाटर हाइड्रेंट की सुविधा दी गई है | साथ ही हर 500 मीटर पर इससे निकलने की आपात सुविधा भी है | हर 250 मीटर पर ब्राडकास्टिंग सिस्टम और सीसीटीवी कैमरों के साथ आटोमेटिक इंसिडेंट डिटेक्शन सिस्टम लगा है | टनल एक पहाड़ को भेदकर बनाया गया –

  • माइनस 23 डिग्री में भी निर्माण कार्य हुआ |
  • इमरजेंसी में एग्जिट गेट मुख्य सुरंग के नीचे |
  • एग्जिट गेट कुछ-कुछ दूरी पर बनाए गए हैं |
  • टनल पूरे साल 24 घंटे खुला रहेगा |
  • टनल हर मौसम के हिसाब से बना है |
  • बर्फ और हिमस्खलन का कोई असर नहीं होगा |
  • आग जैसे हालात से निपटने के पूरे इंतजाम |

पीर पंजाल की पहाड़ियों को काटकर बनाई गई अटल सुरंग के कारण मनाली से लेह की दूरी तो 46 किमी कम हुई है | इसके अलावा अटल सुरंग 13,050 फीट पर स्थित रोहतांग दर्रे के लिए वैकल्पिक मार्ग भी है | मनाली वैली से लाहौल और स्पीति वैली तक पहुंचने में करीब 5 घंटे का वक्त लगता था | लेकिन इस टनल के रास्ते ये दूरी अब करीब 10 मिनट में ही तय हो सकेगी | यानी आप ये समझिये कि अटल टनल नहीं, बल्कि इंच-इंच ज़मीन की रक्षा के लिए ये नए भारत का अटल संकल्प है, जिसके बाद चाहे चीन हो या फिर पाकिस्तान, भारत को आंख दिखाने पर 100 बार सोचेंगे | प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने सन 2000 में इस टनल को बनाने का फैसला लिया था | मोदी सरकार ने पिछले साल उनकी याद में इसका नाम अटल टनल रखने का फैसला लिया था | उन्होंने कहा कि अटल सुरंग केंद्र सरकार के उस संकल्प का हिस्सा है कि देश के हर हिस्से में, हर व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचना चाहिए। उन्होंने लोगों को पुराने दिन याद दिलाते हुए कहा, ‘‘लाहौल स्पीति जैसे देश के अनेक हिस्से ऐसे थे जिन्हें अनेक समस्याओं के साथ संघर्ष करने के लिए उनके नसीब पर छोड़ दिया गया था। क्योंकि ऐसे क्षेत्र कुछ लोगों के राजनीतिक स्वार्थ को सिद्ध नहीं करते थे।’’

केंद्र सरकार द्वारा घर-घर बिजली, पानी, गैस और शौचायल की व्यवस्था किए जाने के अपनी सरकार के संकल्प की विस्तृत जानकारी देते हुए उन्होंने जनसभा में मौजूद लोगों को बताया कि कैसे उनकी सरकार लोगों का जीवन आसान बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि अटल सुरंग के बन जाने से स्पीति घाटी में स्थित देश में बौद्ध शिक्षा के एक अहम केंद्र ताबो मठ तक दुनिया की पहुंच और सुगम होने वाली है। उन्होंने कहा, ‘‘एक प्रकार से ये पूरा इलाका पूर्वी एशिया समेत विश्व के अनेक देशों के बौद्ध अनुयायियों के लिए भी एक बड़ा केंद्र बनने वाला है।’’ उन्होंने कहा इतना ही नहीं इससे पूरे क्षेत्र के युवाओं को रोज़गार, खेती, बागवानी व पशुपालन से जुड़े लोगों और नौकरीपेशा, व्यापारी व कारोबारियों को अनेक अवसर उपलब्ध होंगे और लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा, ‘‘अब लाहौल के किसानों की गोभी, आलू और मटर की फसल बर्बाद नहीं होगी बल्कि तेज़ी से बाजार पहुंचेगी।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि अटल सुरंग के न होने से क्षेत्र के लोगों को वर्षों तक जो दर्द और पीड़ा उठानी पड़ी, वह मुश्किल दौर अब उनके बच्चों को नहीं देखना पड़ेगा। उन्होंने कहा, ‘‘अटल सुरंग के बन जाने से लाहौल के लोगों के लिए नई सुबह हुई है। 45-46 किलोमीटर की दूरी सीधे कम हो गई। कभी कल्पना भी नहीं की होगी लोगों ने कि उनके जीवनकाल में यह सुविधा उन्हें मिलेगी।’’ उन्होंने कहा कि अब लाहौल स्पीति क्षेत्र के औषधीय पौधे और अनेक प्रकार के मसालें देश ही नहीं पूरी दुनिया में पहचान बन सकते हैं। इस पूरे क्षेत्र में पर्यटन को लेकर अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा, ‘‘प्रकृति की असीम कृपा है यहां। आध्यात्म और आस्था से जुड़े पर्यटन के लिए अद्भुत संभावना है। अब इस पूरे क्षेत्र को नया आयाम मिलने वाला है।’’

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