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रामः अद्यापि अस्माकं मने बसति,अस्माकं च् संस्कृतिस्य आधारम् – प्रधानमंत्री ! राम आज भी हमारे मन में बसते हैं और हमारी संस्कृति के आधार हैं – प्रधानमंत्री !

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: दिल्लीत: लक्ष्मण नगरं लक्ष्मण नगरतः अयोध्याम् प्राप्त्वा हनुमान गढ़ी: दर्शनम् अकरोत् पुनः च् रामललास्य दर्शनित्वा पूजाम् अर्चनाम् अकरोत्, पुनः पारिजात वृक्षम् अरोपति ! अस्य उपरांत पी एम मोदी: भूमि पूजनस्य अनुष्ठाने असम्मिलत् मन्दिरस्य च् आधार शिलाम् अधरयत् ! तस्य स्वागतम् उत्तर प्रदेशस्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ: अकरोत् ! कार्यक्रमे मोहन भागवतः सह १७५ अतिथिम् उपस्थितम् अरहत् ! सुरक्षा व्यवस्थाम् अरहत् व्यवस्थितम् !

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली से लखनऊ, लखनऊ से अयोध्या पहुंचकर हुनुमान गढ़ी के दर्शन किए और फिर रामलला के दर्शन कर पूजा अर्चना की, पुनः पारिजात वृक्ष लगाया !इसके बाद पी एम मोदी भूमि पूजन के अनुष्ठान में शामिल हुए और मंदिर की आधार शिला रखी ! उनका स्वागत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया ! कार्यक्रम में मोहन भागवत सहित 175 मेहमान रहे मौजूद ! सुरक्षा व्यवस्था रही चाक चौबंद !

आगतः ज्ञायन्ति अन्य दलस्य नेतारः उक्त कार्यक्रमे किं अकथयत् !

आइये जानते हैं अन्य दल के नेताओं ने उक्त कार्यक्रम पर क्या कहा !

कांग्रेसम् नेता राहुल गांधी: ट्वीतस्य माध्यमेन अकथयत् मर्यादा पुरुषोत्तम भगवतः रामः सर्वोत्तम मानवीय गुणानाम् स्वरूपम् अस्ति ! सः अस्माकंमनसि अन्तःस्थले अबसत् मानवतास्य मूल भावनाम् अस्ति ! राम प्रेमम् अस्ति, ते कदा द्वेषे प्रकटम् न भव्यते ! राम: न्यायम् अस्ति, ते कदा अन्याये प्रकटम् न भव्यते !

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ट्वीट के माध्यम से कहा मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम सर्वोत्तम मानवीय गुणों का स्वरूप हैं ! वे हमारे मन की गहराइयों में बसी मानवता की मूल भावना हैं ! राम प्रेम हैं, वे कभी घृणा में प्रकट नहीं हो सकते ! राम करुणा हैं, वे कभी क्रूरता में प्रकट नहीं हो सकते ! राम न्याय हैं, वे कभी अन्याय में प्रकट नहीं हो सकते !

समाजवादी दलस्य नेता पूर्व वा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव: जयतु महादेव: जयतु सिया – राम:, जयतु राधे – कृष्ण: जयतु हनुमानेन स्व ट्वितस्य प्रारम्भयतुम्, भगवतः शिवस्य कल्याणम्, श्री रामस्य अभ्यत्वम् श्रीकृष्णस्य वा उन्मुक्त भावेन सर्वम् अपरिपूर्णयत् ! वर्तमान भाविष्य च् वंशानि अपि मर्यादा पुरुषोत्तमस्य दर्क्ष्येन मार्गस्य अनुरूपम् सत् मनेन सर्वस्य क्षेमम् शान्तये च् मर्यादास्य पालनम् करिष्यन्ति !

समाजवादी पार्टी के नेता व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जय महादेव जय सिया – राम जय राधे – कृष्ण जय हनुमान से अपने ट्वीट की शुरुआत करते हुए कहा, भगवान शिव के कल्याण, श्रीराम के अभयत्व एवं श्रीकृष्ण के उन्मुक्त भाव से सब परिपूर्ण रहें ! मौजूदा और भावी पीढ़ियां भी मर्यादा पुरुषोत्तम के दिखाए मार्ग के अनुरूप सच्चे मन से सबकी भलाई और शांति के लिए मर्यादा का पालन करेंगी !

राष्ट्रपति अददात् अभिनंदनम् !

राष्ट्रपति ने दी बधाई !

राम मन्दिरम् निर्माणस्य शुभारम्भे सर्वस्य अभिनंदनम् ! मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु रामस्य मन्दिरस्य निर्माण न्यायप्रक्रियास्य अनुरूपम् जन सामान्यस्य च् उत्साहम् सामाजिक सौहार्दस्य वा आधारे भवति ! मह्यं विश्वासम् अस्ति तत मंदिर परिसरम्, रामराज्यस्य आदर्शेषु आधारितम् आधुनिक भारतस्य प्रतिकम् बनिष्यति !

राम मंदिर निर्माण के शुभारंभ पर सभी को बधाई ! मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु राम के मंदिर का निर्माण न्यायप्रक्रिया के अनुरूप तथा जन साधारण के उत्साह व सामाजिक सौहार्द के संबल से हो रहा है ! मुझे विश्वास है कि मंदिर परिसर, रामराज्य के आदर्शों पर आधारित आधुनिक भारत का प्रतीक बनेगा !

कार्यक्रमे राम मंदिर न्यासस्य अध्यक्षम् नृत्य गोपाल दासः अकथयत् !

कार्यक्रम में राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास ने कहा !


मया बहुधा अपृच्छयत् तत कदा राम मन्दिरस्य निर्माणम् करिष्यामि ! सम्प्रति शीघ्रेव अस्य निर्माणम् भविष्यति ! भक्तानां मनोकामनां पूर्णिष्यति !

मुझसे कई बार पूछा गया कि कब राम मंदिर का निर्माण किया जाएगा ! अब जल्द ही इसका निर्माण होगा ! भक्तों की मनोकामना पूरी होगी !

कार्यक्रमे योगी: अकथयत् !

कार्यक्रम में योगी ने कहा !

अद्यस्य दिवसम् ऐतिहासिकम् अस्ति ! मन्दिराय ५०० वर्षस्य संघर्षयति ! पी एम नरेंद्र मोदिस्य नेतृत्वे, भारतस्य लोकतंत्रिकम् शुल्कानि तस्य न्यायपालिकस्य च् शक्तिम् विश्वम् अदृक्ष्यते तत शान्तिपूर्णम्, लोकतंत्रिकम् संवैधानिकम् रूपेण च् हलम् कृतवान कार्यम् कथं भव्यते !

आज का दिन ऐतिहासिक है ! मंदिर के लिए 500 सालों का संघर्ष रहा है ! पी एम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों और उसकी न्यायपालिका की शक्ति ने दुनिया को दिखा दिया है कि शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक रूप से हल किए गए मामले कैसे हो सकते हैं !

कार्यक्रमे सरसंघ चालक मोहन भागवत: अकथयत् !

कार्यक्रम में सरसंघ चालक मोहन भागवत ने कहा !

अस्य मंदिर निर्माय प्रणात् प्राणेन अनेकानि जनानि बलिदानम् अददात् यत् अत्र उपस्थितम् न सन्ति ! आडवाणी: अद्य स्व गृहे तिष्ठवा कार्यक्रमस्य पश्यति ! कति जनाः इदृषिम् सन्ति यत् अद्य परिस्थितिनां कारणेन अत्रे न आहूयन्ते ! तु सः प्रसन्नम् अस्ति ! भारतम् आत्मनिर्भरम् निर्माणस्य यत् भावम् आसीत् तस्य अधिष्ठानम् निर्माणस्य कार्यम् आरम्भयति अद्य !

इस मंदिर निर्माण के लिए जी जान से अनेक लोगों ने बलिदान दिया जो यहां उपस्थित नहीं हैं ! आडवाणी जी आज अपने घर में बैठकर कार्यक्रम को देख रहे हैं ! कितने लोग ऐसे हैं जो आज हालातों की वजह से यहां पर बुलाएं नहीं जा सकते हैं लेकिन वह खुश हैं ! भारत को आत्मनिर्भर बनाने का जो भाव था उसका अधिष्ठान बनाने का कार्य शुरू हो रहा है आज !

आगतः ज्ञायन्ति प्रधानमंत्र उक्त कार्यक्रमे किं अकथयत् !

आइये जानते हैं प्रधानमंत्री ने उक्त कार्यक्रम में क्या कहा !

सियावर रामचन्द्रस्य जयतु, जयतु सियाराम: अद्य इयम् जयघोषम् केवलं सियारामस्य नगरैव न शृणोति अपितु अस्य प्रतिध्वनिम् सम्पूर्णम् विश्वे प्रस्सरयति ! देशवासिना: विश्वेषु च् प्रस्सरयन्ति कोटिनः भक्तानां अद्यस्य अस्य शुभ अवसरे अभिनंदनम् ! अयम् मम सौभाग्यम् अस्ति तत मह्यं श्रीराम क्षेत्र न्यासम् इयम् अवसरम् अददात् ! आगमनमपि आवश्यकम् आसीत् कुत्रचित् रामस्य कार्यम् कृते बिनाम् मह्यं कुत्र विश्रामम्…!

सियावर राम चंद्र की जय, जय सियाराम आज यह जयघोष सिर्फ सियाराम की नगरी में ही नहीं सुनाई दे रहा है बल्कि इसकी गूंज पूरे विश्व में फैल रही है ! देशवासियों और विश्वभर में फैले करोड़ों भक्तों को आज के इस शुभ अवसर पर बधाई ! यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे श्रीराम क्षेत्र ट्रस्ट ने यह अवसर दिया ! आना भी जरूरी था क्योंकि राम काज कीन्हे बिनु मोहि कहाँ बिश्राम…!

भारतम् एकम् च् इतिहासम् रचयति ! अद्य पूर्णम् देशम् रोमांचितम् अस्ति ! अद्य पूर्णम् भारतम् भावुकम् अस्ति ! सदिनां प्रतिक्षाम् अद्य समाप्तम् भवति ! कोटिनः जनानि अद्य अयम् विस्वासेव न भविष्यति तत सः स्व जीविते अस्य पावन अवसरम् पश्यन्ति ! वर्षेभ्यः टट्टम् पटगृहम् च् न्यवसते अस्माकं रामललाय सम्प्रति एकम् मन्दिरस्य निर्माणम् भविष्यति ! अद्य रामजन्म भूमिम् मुक्तम् अभवत् !

भारत और एक इतिहास रच रहा है ! आज पूरा देश रोमांचित है ! आज पूरा भारत भावुक है ! सदियों का इंतजार आज समाप्त हो रहा है ! करोड़ों लोगों को आज ये विश्वास ही नहीं हो रहा होगा कि वो अपने जीते इस पावन अवसर को देख रहे हैं ! बरसों से टाट और टेंट में रह रहे हमारे रामलला के लिए अब एक भव्य मंदिर का निर्माण होगा ! आज रामजन्म भूमि मुक्त हुई !

राम मन्दिराय बहु वंशानि सदिनैव संघर्षम् अकरोत् अद्य अयम् पलम् तस्य परिणामम् अस्ति ! यस्य तपस्याम् राम मंदिरे आधारस्य इव अयुज्यत्, अहम् तम् सर्वाणि जनानि १३० कोटि देशवासिनाम् प्रति शिरम् नातित्वा नमनम् करोमि !

राम मंदिर के लिए कई – कई पीढ़ियों ने सदियों तक संघर्ष किया आज यह पल उसी का नतीजा है ! जिनके त्याग से आज यह सपना साकार हो रहा है, जिनकी तपस्या राम मंदिर में नीवं की तरह जुड़ी हुईं हैं, मैं उन सभी लोगों को 130 करोड़ देशवासियों की तरफ से सर झुकाकर नमन करता हूं !

राम मन्दिरस्य आन्दोलनेन युज्यति प्रत्येक पुरुषः यत् जत्र अस्ति सः अस्य आयोजनम् पश्यति, सः भाव विभोरम् अस्ति सर्वाणाम् आशीषम् ददाति ! राम अस्माकं हृदये वसतुम् ! भवान् रामस्य अद्भुतं शक्तिम् पश्य, किं केचन न अभवत् अस्तित्वम् समाप्तस्य तु रामः अद्यापि मने अबसत् अस्माकं च् संस्कृतिस्य आधारम् अस्ति ! श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तमम् अस्ति !

राम मंदिर के आंदोलन से जुड़ा हर शख्स जो जहां है वो इस आयोजन को देख रहा है, वो भाव विभोर है और सभी को आशीर्वाद दे रहा है ! राम हमारे मन में गढ़े हुए हैं ! आप भगवान राम की अद्भुत शक्ति देखिए, क्या कुछ नहीं हुआ अस्तित्व मिटाने का लेकिन राम आज भी हमारे मन में बसे हैं और हमारी संस्कृति के आधार है ! श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं !

अयोध्यायां रामस्य अस्य भव्य मन्दिराय अद्य भूमि पूजनम् अभवत् ! अत्र आगमनेन पूर्वम् अहम् हनुमान गढ़ीस्य दर्शनम् अकरोत् यस्य प्रत्येक कार्यम् हनुमान: करोति ! हनुमानस्य आशीर्वादात् श्रीराम मन्दिरस्य भूमि पूजनस्य कार्यम् आरम्भयत् ! रामस्य मन्दिरम् अस्माकं संस्कृतिस्य आधुनिकम् प्रतीकम् बनिष्यति ! अस्माकं शाश्वतं आस्थायाः प्रतीकम् बनिष्यति !

अयोध्या में राम के इस भव्य मंदिर के लिए आज भूमि पूजन हुआ है ! यहां आने से पहले मैंने हनुमान गढ़ी के दर्शन किए जिनके हर काम हनुमान करते हैं ! हनुमान जी के आशीर्वाद से श्रीराम मंदिर के भूमि पूजन का कार्य शुरू हुआ ! राम का मंदिर हमारी संस्कृति का आधुनिक प्रतीक बनेगा ! हमारी शाश्वत आस्था का प्रतीक बनेगा !

इयम् मन्दिरम् कोटि – कोटि जनानाम् सामूहिकम् संकल्पस्य्यापि प्रतीकम् बनिष्यति ! इयम् मन्दिरम् आगमनात् वंशानि आस्थाम्, श्रद्धां संकल्पस्य च् प्रेरणाम् दाष्यति ! मन्दिरम् निर्मनेन अयोध्यायाः अस्य क्षेत्रस्य पूर्णम् अर्थतंत्रम् परिवर्तष्यति प्रत्येकं च् क्षेत्रे अवसरम् बर्धष्यति !

यह मंदिर करोड़ों – करोड़ों लोगों के सामूहिक संकल्प का भी प्रतीक बनेगा ! यह मंदिर आने वाली पीढ़ियों को आस्था, श्रद्धा और संकल्प की प्रेरणा देता रहेगा ! मंदिर बनने से अयोध्या के इस क्षेत्र का पूरा अर्थतंत्र बदल जाएगा और हर क्षेत्र में अवसर बढ़ेंगे !

विचारणीयम् सम्पूर्ण विश्वस्य जनः अत्र दर्शनम् कृत आगमिष्यति ! कति केचन परिवर्तिष्यति, सम्पूर्णम् अर्थतंत्रम् परिवर्तिष्यति ! इयम् महोत्सवम् अस्ति विश्वासम् मनेन युज्यतस्य, लोकम् आस्थेन युज्यतस्य, वर्तमानम् अतीतेन युज्यतस्य स्वम् च् संस्कारेन युज्यतस्य ! अद्यस्य इयम् ऐतिहासिकम् पलम् युगानि युगानि एव भारतस्य कीर्ति ध्वजारोहणष्यन्ति ! अद्यस्य इयम् दिवसम् सत्यम्, अहिंसाम्, आस्थाम् बलिदानम् च् न्यायप्रिय भारतस्य पारितोषिकम् अस्ति !

सोचिए पूरी दुनिया के लोग यहां दर्शन करने आएंगे ! कितना कुछ बदल जाएगा, पूरा अर्थतंत्र बदल जाएगा ! यह महोत्सव है विश्वास को मन से जोड़ने का, लोक को आस्था से जोड़ने का, वर्तमान को अतीत से जोड़ने का और स्व को संस्कार से जोड़ने का ! आज का यह ऐतिहासिक पल युगों युगों तक भारत की कीर्ति पताका को फहराते रहेंगे ! आज का यह दिन सत्य, अहिंसा, आस्था और बलिदान को न्याय प्रिय भारत की भेंट हैं !

श्री रामः सामाजिकम् समरसताम् स्व प्रेमस्य आधारम् अबनायत् ! तेन प्रत्येकेन सहयोगम् अग्रहण्यत् ! अत्रैव तत एकम् चिक्रोडस्य महत्तामपि तेन स्वीकृतवन्तः ! रामस्य दृढ़ताम् युगानि युगानि एव प्रेरितं करिष्यति ! निर्धनेषु दुखितेषु च् तस्य विशेषम् कृपा रहिष्यति अतएव मातु सीता तस्मै कथ्यति – दीनदयालं दुखम् शमनम् समर्थः, हरेत् नाथ मम बहु संकटम् ! यत् रामः मध्य युगे तुलसीस्य, नानकस्य कबीरस्य च् दोहेषु सन्ति ! रामस्य अयमेव सर्वव्यापकताम् भारतस्य विविधते अनेकतांस्य प्रतीकम् अस्ति !

श्रीराम ने सामाजिक समरसता को अपने प्रेम का आधार बनाया ! उन्होंने हर किसी से सहयोग लिया ! यहां तक कि एक गिलहरी की महत्ता को भी उन्होंने स्वीकार किया ! राम की दृढ़ता युगों युगों तक प्रेरित करती रहेगी ! गरीबों और दीन दुखियों पर उनकी विशेष कृपा रहेगी ! इसलिए माता सीता उनसे कहती हैं – दीन दयाल बिरिदु संभारी, हरहु नाथ मम संकट भारी ! जो राम मध्य युग में तुलसी, नानक और कबीर के दोहों में हैं ! राम की यही सर्वव्यापकता भारत की विविधता में अनेकता का प्रतीक है !

अस्माकं अत्र शास्त्रेषु अकथ्यते तत सम्पूर्ण धरे रामस्य यथा दयावानम् कोपि न अभवत् ! श्रीरामस्य सामाजिकम् सन्देशम् अस्ति तत नरः नारी सर्व सम रूपेण सुखीम् भव ! तस्य सन्देशम् अस्ति तत कृषकः पशुपालकः सर्वम् प्रसन्नम् रहेत् ! रामः अकथयत् तत वृद्धानां सम सेवां भवनीय ! यत् शरणे आगतः तस्य रक्षाम् कृतं सर्वस्य कर्तव्यम् अस्ति ! श्री रामस्य सन्देशम् अस्ति तत स्व मातृ भूमि स्वर्गादपि बर्द्धित्वा भवति ! अयमपि रामः एव कथयति तत भयम् बिना प्रीति न भवति ! रामस्य अयम् नीतिम्, रीतिम् सदेभ्यः भारतस्य मार्गदर्शनम् कृतवन्ति ! महात्मा गांधी: येन संदेषु रामराज्यस्य स्वप्नम् अपश्यत् !

हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है कि पूरी पृथ्वी में राम के जैसा दयावान कोई हुआ ही नहीं ! श्रीराम का सामाजिक संदेश है कि नर, नारी सभी समान रूप से सुखी हो ! उनका संदेश है कि किसान पशुपालक सभी खुश रहें ! राम ने कहा कि बुजुर्गों की बराबर सेवा होनी चाहिए ! जो शरण में आए उसकी रक्षा करना सभी का कर्तव्य है ! श्रीराम का संदेश है कि अपनी मातृभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर होती है ! यह भी राम जी ही कहते हैं कि भय बिनु होई न प्रीति ! राम की यही नीति, रीति सदियों से भारत का मार्गदशन करती रही है ! महात्मा गांधी ने इन्हीं संदेशों में रामराज्य का सपना देखा था !

रामः परिवर्तनस्य पक्षधरम् आसीत्, आधुनिक्तास्य पक्षधरम् आसीत् ! तस्य येन प्रेरणानि सह अद्य भारतम् अग्रे बर्ध्यति ! तेन वयं स्व कर्तव्यानाम् पालनम् कृतस्य शिक्षाम् अददात् ! वयं स्वेस्य प्रस्त्रेभ्यः इदानीं मन्दिरस्य प्रस्तराणि अयुज्यत् ! यदा – यदा मानवाः रामम् अमन्यत् अस्माकं विकासम् अभवत् ! वयं सर्वस्य भावनानां अस्मरणयत् ! स्व परिश्रमेण एकम् आत्मविश्वासीम् आत्मनिर्भरम् भारतस्य अनिर्मण्यते !

राम परिवर्तन के पक्षधर थे, राम आधुनिकता के पक्षधर थे ! उनकी इन्हीं प्रेरणाओं के साथ आज भारत आगे बढ़ रहा है ! उन्होंने हमें अपने कर्तव्यों का पालन करने की सीख दी है ! हमें आपसी शिलाओं से इन मंदिर की शिलाओं को जोड़ना है ! जब – जब मानव ने राम को माना है हमारा विकास हुआ है ! हमें सबकी भावनाओं का ख्याल रखना है ! अपने परिश्रम से एक आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना है !

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