35.5 C
New Delhi

किं चिनस्य एप्प प्रतिबंध कारणेंन युद्ध विजयस्यति भारत ? चाइनीज़ एप्प पर बैन करने से क्या वार जीतेगा भारत ?

Date:

Share post:

सीमे भारत चिनस्य मध्ये विवादस्य करणात भारत सरकार चिनस्य 59 एप्प प्रतिबंधित कृतवान,यत्र टिकटॉक सह बहु लोकप्रियम् एप्प सन्ति !

सीमा पर भारत-चीन बीच विवाद के कारण भारत सरकार ने चीन के 59 ऐप बैन कर दिया है,जिसमें टिकटॉक समेत कई लोकप्रिय ऐप है !

आगतः जानन्ति टिकटॉक एप्प भारते कति लोकप्रियम् अस्ति ?

आइए जानते हैं टिकटॉक एप्प भारत में कितना लोकप्रिय है ?

चिनस्य कम्पनी बाइटडाँसस्य इदम् प्रोडक्ट भारते यथावत् 11.9 कोटि जनाः प्रयोगम् कुर्वन्ति ! टिकटॉक 2016 इषवे अवतरणम् अभवत् स्म,तदुपरांतात् अस्य लोकप्रियताम् सततम् अबिवृध्यन्ति ! सम्प्रतेव अस्य एप्पम् 2 अर्बुदात् बहुदा डाउनलोड कृतनोति ! अस्य एप्पे जनाः लघु लघु चित्रपट निर्मयन्ति प्रथमात् च ध्वनिवद्ध गीते कथानके वा स्व ओष्ठम् दोलयन्ति ! टिकटाके चित्रपट निर्मयित्वा बहु जनाः बहुचर्चितापि अभवत् !

चीनी कंपनी बाइटडांस का ये प्रोडक्ट भारत में करीब 11.9 करोड़ लोग इस्तेमाल करते हैं।टिकटॉक 2016 में लॉन्च हुआ था, जिसके बाद से उसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती ही जा रही है। अब तक इस ऐप को 2 अरब से भी अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है। इस ऐप में लोग छोटी-छोटी वीडियो बनाते हैं और पहले से रिकॉर्ड गानों या डायलॉग पर लिप्सिंग करते हैं। टिकटॉक पर वीडियो बनाकर बहुत से लोग सेलिब्रिटी भी बन गए हैं।

टिकटाकेन कति आयम् करोति चिनः ? सम्प्रति कति क्षति भविष्यति ?

टिकटॉक से कितना कमाता है चीन ? अब कितना होगा नुकसान ?

वार्ता केवलं टिकटाकस्य करोतु तत कम्पनिम् 2019 इषविस्य चतुर्थ त्रैमासे 377 कोटि रूप्यकस्य आयम् अभवत् स्म् ! वर्षेन वर्षस्य आकलेन् टिकटॉकस्य आय चतुर्थ त्रैमासे यथोचित 310 गुणांक अवर्धतु ! सम्पूर्ण 2019 वित्त वर्षे कम्पनिम् यथोचित 720 कोटि रुप्यकस्य आय केवलं टिकटॉक कारणस्य अभवत् स्म ! यति केवलं टिकटॉक प्रतिबंधनेव चिनम् प्रतिवर्षम् यथोचित 720 कोटि रूप्यकस्य क्षति भविष्यन्ति ! विचारणीय केवलं
टिकटॉकेन चिन तावत् आयतु तर्हि अन्य एप्पेण कति आयिष्यन्ति ?

बात सिर्फ टिकटॉक की करें तो कंपनी को 2019 की चौथी तिमाही में 377 करोड़ रुपये की आय हुई थी। साल दर साल के हिसाब से टिकटॉक की कमाई चौथी तिमाही में करीब 310 गुना बढ़ गई। पूरे 2019 वित्त वर्ष में कंपनी को करीब 720 करोड़ रुपए की कमाई सिर्फ टिकटॉक के जरिए हुई थी। यानी सिर्फ टिकटॉक बंद होने से ही चीन को हर साल करीब 720 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। विचार करें अगर टिकटॉक से चीन इतना कमाता है तो अन्य एप्प से कितना कमाता होगा ?

कः कथ्यन्ति प्रयोगकर्त: भारत सरकार विरोधिन् च् ?

क्या कहते हैं यूजर्स और भारत सरकार विरोधी ?

टिकटॉक प्रयोगकर्त: भारत सरकार विरोधिन् कथ्यन्ति ! केवलं एप्प प्रतिबंधित कृतेन चिन न परजितष्यति ! चिनस्य पराजयतुम् तर्हि भुस्तरे कार्यम् करोतु !
भ्राताः कश्चित देशस्य इकनॉमी क्षतिग्रस्त कृत्वात् सम्पूर्ण देश: क्षतिग्रस्तम् भवति,तर्हि कश्चित देशस्य पराजयतुम् तर्हि प्रथमे तत्रस्य वस्तुना: प्रयोग कर्तुम्,कृणितुम्,बाधयतु विषाणुस्य आक्रमयतु वा ! चिन वैह्य कृतवान एकः विषाणुस्य सर्वे देशस्य प्रसारित्वा,सर्वेषाम् देशानाम् धनहीन कृतवान। सम्प्रति भारत चिनस्यैव भाषे चिनम् उत्तरम् ददाति।

टिकटॉक यूजर्स व भारत सरकार विरोधी कहते हैं,केवल एप्प बन्द कर देने से चीन नहीं हारेगा !चीन को हराना है तो जमीनी स्तर पर कार्य करें !
बन्धुओं किसी देश की इकनॉमी तबाह कर देने से पूरा देश तबाह हो जाता है,इसलिए किसी देश को हराना है तो पहले वहां की चीजों को प्रयोग करना,खरीदना बंद कर दो या फिर वायरस हमला करो ! चीन ने वही किया एक वायरस को सभी देशों में फैलाकर,सभी देशों को धन हीन कर दिया है। अब भारत चीन की ही भाषा में चीन को उत्तर दे रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Related articles

How the Islamabad Talks Failed: A Comprehensive Analysis of the U.S.–Iran Mediation Collapse in Pakistan

The Islamabad Talks of April 11–12, 2026, represented the most significant diplomatic attempt to convert a fragile two-week...

How West Bengal will vote this time? Can we expect a change and departure of Mamata Banerjee

The political landscape of West Bengal is currently undergoing its most volatile phase since the historic 2011 transition...

How USA Iran negotiations are just an eyewash by Pakistan

The complex triangle between the United States, Iran, and Pakistan is one of the most intricate puzzles in...

Recent UGC, NCERT controversies were avoidable: Dharmendra Pradhan

Union Education Minister Dharmendra Pradhan described the recent controversies surrounding the UGC equity regulations and the NCERT textbook...