32 C
New Delhi

दीपोत्सव पूजायाः मुहूर्तम् कदास्ति ! कीदृषिम् कुर्यात् लक्ष्मी गणेशस्य पूजनम् ? दिवाली पूजा का मुहूर्त कब है ? कैसे करें लक्ष्मी गणेश की पूजा ?

Date:

Share post:

अद्य विक्रम संवत २०७७ कार्तिक मास कृष्ण पक्षस्य अमावस्या अस्ति ! अद्य चन्द्रमा तुला राशियां अस्ति ! तुलायाः स्वामी ग्रह शुक्रमस्ति ! अद्य दीपोत्सवस्य पर्वम् मान्यतु !

आज विक्रम संवत 2077 कार्तिक माह कृष्ण पक्ष की अमावस्या है ! आज शुभ दीपावली है ! आज शनिवार है ! आज चन्द्रमा तुला राशि में है ! तुला का स्वामी ग्रह शुक्र है ! आज दीवाली का पर्व मनाएं !

श्री सूक्तस्य पाठ बहैव शुभ फल प्रदानम् करिष्यति ! पंचांगस्य अध्ययनेन तम् दिवसस्य समस्त ग्रह गोचर नक्षत्रस्य वा ज्ञानम् प्राप्तम् भव्यते ! प्रातःकाल भगवतस्य पूजाया सह पंचांग पठित्वा दिवसस्य प्रारम्भ करणीय !

श्री सूक्त का पाठ बहुत ही शुभ फल प्रदान करेगा ! पञ्चाङ्ग के अध्ययन से उस दिन के समस्त ग्रह गोचर व नक्षत्र का ज्ञान प्राप्त हो जाता है ! प्रातःकाल भगवान की पूजा के साथ पंचांग पढ़कर ही दिवस का प्रारंभ करना चाहिए !

मार्तण्डम् एक राशियां एक मासम् बसति ! तम् दिवसस्य राशि नक्षत्र स्वामी ग्रहस्य वा बीज मन्त्रस्य जपम् करोतु तर्हि तम् दिवसस्य भाग्ये वृद्धिम् भवति ! मुहूर्त ज्ञानम् कृत्वैव शुभ कार्य आरम्भम् करोतु ! अद्य कनकधारास्तोत्रस्य पाठम् करोतु ! अन्न दान कृतं अन्नंत पुण्यदायीम् अस्ति !

सूर्य तो एक राशि में एक माह रहते हैं ! उस दिन के राशि व नक्षत्र स्वामी ग्रह के बीज मंत्र का जप कर लें तो उस दिन के भाग्य में वृद्धि होती है ! मुहूर्त ज्ञान करके ही शुभ कार्य आरम्भ करें ! आज कनकधारास्तोत्र का पाठ करें ! अन्न दान करना अनन्त पुण्यदायी है !

दिनांक 14 नवम्बर

माह कार्तिक

पक्ष कृष्ण

तिथि चतुर्थी 02:15 सायं तक फिर अमावस्या !

दिवस शनिवार

नक्षत्र स्वाती

करण शकुनि

सूर्योदय 06:42 आरोहणम् मार्तंडम् (am)

सूर्यास्त 05:29 पतनम् मार्तंडम् (pm)

सूर्य राशि तुला

चन्द्र राशि तुला

शुभ मुहूर्त:-

अभिजीत मुहूर्त 11:44 प्रातः से 12:30 दोपहर तक !

विजय मुहूर्त 01:54 सायं से 02:40 सायं तक !

गोधुली मुहूर्त 05:25 सायं से 06:01 सायं तक !

राहुकाल प्रातःकाल 09 बजे से 10:30 बजे तक !

दीवाली पूजा का शुभ मुहूर्त:-

पहला 05:29 सायं से 08:33 रात्रि तक

दूसरा मुहूर्त रात्रि 12 से 03 बजकर 20 मिनट तक !

तीसरा मुहूर्त 05:30 सायं से 07:23 सायं तक !

राहुकालस्य कालम् कश्चित महत्वपूर्ण न कृतं कश्चित च् नव कार्यम् आरम्भ न कृतस्य मान्यतामस्ति ! सहैव दीपोत्सव अवसरे इति त्रय मुहूर्तषु कश्चित एके पूजनम् कृतशक्नोति !

राहुकाल के दौरान कोई महत्वपूर्ण नहीं करने और कोई नया कार्य शुरू नहीं करने की मान्यता है ! साथ ही दिवाली के मौके पर इन तीन मुहूर्तों में किसी एक पर पूजा की जा सकती है !

इदृशं कुर्यात् पूजनम् !

ऐसे करें पूजा !

देवी लक्ष्मी गणपति महोदयस्य च् पूजनम् दीपोत्सवे संध्यायाः कालम् क्रियते ! मान्यति तत इति दिवसं यदि देवी भवतः प्रसन्नम् अभवत् तर्हि भवान् धन-धान्यम् सुखेन सह च् ऐश्वर्यस्य प्राप्तिम् भविष्यति ! कुत्रचित इति दिवसं गणपति महोदयस्य अपि विशेषम् पुजाम् भवति !

देवी लक्ष्मी और गणपति जी की पूजा दीपावली पर शाम के समय की जाती है ! माना जाता है कि इस दिन यदि देवी आप पर प्रसन्न हो गईं तो आपको धन-धान्य और सुख के साथ ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी ! क्योंकि इस दिन गणपति जी की भी विशेष पूजा होती है !

अतएव तस्य आशीर्वादेन मनुष्यम् प्रत्येक संकटात् मुक्तिम् प्राप्यति कार्ये च् सफलताम् ! देवी लक्ष्मी गणपति महोदयः च् द्वयोव धन ऐश्वर्यस्य प्राप्तिम् च् क्रियेत् ! अतएव दीपोत्सवे अस्य पूजने कश्चित भूलम् नासि !

इसलिए उनके आशीर्वाद से मनुष्य को हर संकट से मुक्ति मिलती है और कार्य में सफलता ! देवी लक्ष्मी और गणपति जी दोनों ही धन और ऐश्वर्य की प्राप्ति कराते हैं ! इसलिए दिवाली पर इनकी पूजा में कोई चूक न हो !

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Related articles

Why and How “Hanuman Ansh” Became a New Cultural Phenomenon in India: Faith, Youth, Social Media and the Return of Spiritual Storytelling

Introduction: A ₹10-Lakh Opening That Became a Cultural Conversation Every once in a while, a film succeeds in a...

“Modi Is Hedging Against Trump, One Deal at a Time”: What the New York Times Analysis Says—and Why It Matters for India

On August 29, 2026, The New York Times published an article by Anupreeta Das titled “Modi Is Hedging...

India Opens Missile Technology to Private Industry: What It Could Mean for the Indian Defence Manufacturing Ecosystem

India has taken one of the most consequential steps in the evolution of its indigenous defence-industrial ecosystem by...

Devastation in Nepal: What Caused the Catastrophic Himalayan Disaster and Why the Risks Are Growing

Nepal is confronting a devastating natural disaster after a massive wall of water, mud, rocks and glacial debris...