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दीपोत्सव पूजायाः मुहूर्तम् कदास्ति ! कीदृषिम् कुर्यात् लक्ष्मी गणेशस्य पूजनम् ? दिवाली पूजा का मुहूर्त कब है ? कैसे करें लक्ष्मी गणेश की पूजा ?

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अद्य विक्रम संवत २०७७ कार्तिक मास कृष्ण पक्षस्य अमावस्या अस्ति ! अद्य चन्द्रमा तुला राशियां अस्ति ! तुलायाः स्वामी ग्रह शुक्रमस्ति ! अद्य दीपोत्सवस्य पर्वम् मान्यतु !

आज विक्रम संवत 2077 कार्तिक माह कृष्ण पक्ष की अमावस्या है ! आज शुभ दीपावली है ! आज शनिवार है ! आज चन्द्रमा तुला राशि में है ! तुला का स्वामी ग्रह शुक्र है ! आज दीवाली का पर्व मनाएं !

श्री सूक्तस्य पाठ बहैव शुभ फल प्रदानम् करिष्यति ! पंचांगस्य अध्ययनेन तम् दिवसस्य समस्त ग्रह गोचर नक्षत्रस्य वा ज्ञानम् प्राप्तम् भव्यते ! प्रातःकाल भगवतस्य पूजाया सह पंचांग पठित्वा दिवसस्य प्रारम्भ करणीय !

श्री सूक्त का पाठ बहुत ही शुभ फल प्रदान करेगा ! पञ्चाङ्ग के अध्ययन से उस दिन के समस्त ग्रह गोचर व नक्षत्र का ज्ञान प्राप्त हो जाता है ! प्रातःकाल भगवान की पूजा के साथ पंचांग पढ़कर ही दिवस का प्रारंभ करना चाहिए !

मार्तण्डम् एक राशियां एक मासम् बसति ! तम् दिवसस्य राशि नक्षत्र स्वामी ग्रहस्य वा बीज मन्त्रस्य जपम् करोतु तर्हि तम् दिवसस्य भाग्ये वृद्धिम् भवति ! मुहूर्त ज्ञानम् कृत्वैव शुभ कार्य आरम्भम् करोतु ! अद्य कनकधारास्तोत्रस्य पाठम् करोतु ! अन्न दान कृतं अन्नंत पुण्यदायीम् अस्ति !

सूर्य तो एक राशि में एक माह रहते हैं ! उस दिन के राशि व नक्षत्र स्वामी ग्रह के बीज मंत्र का जप कर लें तो उस दिन के भाग्य में वृद्धि होती है ! मुहूर्त ज्ञान करके ही शुभ कार्य आरम्भ करें ! आज कनकधारास्तोत्र का पाठ करें ! अन्न दान करना अनन्त पुण्यदायी है !

दिनांक 14 नवम्बर

माह कार्तिक

पक्ष कृष्ण

तिथि चतुर्थी 02:15 सायं तक फिर अमावस्या !

दिवस शनिवार

नक्षत्र स्वाती

करण शकुनि

सूर्योदय 06:42 आरोहणम् मार्तंडम् (am)

सूर्यास्त 05:29 पतनम् मार्तंडम् (pm)

सूर्य राशि तुला

चन्द्र राशि तुला

शुभ मुहूर्त:-

अभिजीत मुहूर्त 11:44 प्रातः से 12:30 दोपहर तक !

विजय मुहूर्त 01:54 सायं से 02:40 सायं तक !

गोधुली मुहूर्त 05:25 सायं से 06:01 सायं तक !

राहुकाल प्रातःकाल 09 बजे से 10:30 बजे तक !

दीवाली पूजा का शुभ मुहूर्त:-

पहला 05:29 सायं से 08:33 रात्रि तक

दूसरा मुहूर्त रात्रि 12 से 03 बजकर 20 मिनट तक !

तीसरा मुहूर्त 05:30 सायं से 07:23 सायं तक !

राहुकालस्य कालम् कश्चित महत्वपूर्ण न कृतं कश्चित च् नव कार्यम् आरम्भ न कृतस्य मान्यतामस्ति ! सहैव दीपोत्सव अवसरे इति त्रय मुहूर्तषु कश्चित एके पूजनम् कृतशक्नोति !

राहुकाल के दौरान कोई महत्वपूर्ण नहीं करने और कोई नया कार्य शुरू नहीं करने की मान्यता है ! साथ ही दिवाली के मौके पर इन तीन मुहूर्तों में किसी एक पर पूजा की जा सकती है !

इदृशं कुर्यात् पूजनम् !

ऐसे करें पूजा !

देवी लक्ष्मी गणपति महोदयस्य च् पूजनम् दीपोत्सवे संध्यायाः कालम् क्रियते ! मान्यति तत इति दिवसं यदि देवी भवतः प्रसन्नम् अभवत् तर्हि भवान् धन-धान्यम् सुखेन सह च् ऐश्वर्यस्य प्राप्तिम् भविष्यति ! कुत्रचित इति दिवसं गणपति महोदयस्य अपि विशेषम् पुजाम् भवति !

देवी लक्ष्मी और गणपति जी की पूजा दीपावली पर शाम के समय की जाती है ! माना जाता है कि इस दिन यदि देवी आप पर प्रसन्न हो गईं तो आपको धन-धान्य और सुख के साथ ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी ! क्योंकि इस दिन गणपति जी की भी विशेष पूजा होती है !

अतएव तस्य आशीर्वादेन मनुष्यम् प्रत्येक संकटात् मुक्तिम् प्राप्यति कार्ये च् सफलताम् ! देवी लक्ष्मी गणपति महोदयः च् द्वयोव धन ऐश्वर्यस्य प्राप्तिम् च् क्रियेत् ! अतएव दीपोत्सवे अस्य पूजने कश्चित भूलम् नासि !

इसलिए उनके आशीर्वाद से मनुष्य को हर संकट से मुक्ति मिलती है और कार्य में सफलता ! देवी लक्ष्मी और गणपति जी दोनों ही धन और ऐश्वर्य की प्राप्ति कराते हैं ! इसलिए दिवाली पर इनकी पूजा में कोई चूक न हो !

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